दहेज एक अभिशाप
दहेज जैसी कुप्रथा के कारण आज न जाने कितनी बहने ओर बेटियां इसकी वजह से खुद की जान गवाँ देती है ।
वेसे हमारे लिये ये कहना बहुत ही आसान है कि हम दहेज के खिलाफ है पर कहा तक ?????
क्या वास्तव में हम दहेज लेनदेन नही करते ????????
क्या वास्तव में हम अपनी बहू को बेटी मानते है अगर हाँ तो बेटी के पिता से भीख रूपी दहेज क्यों लेते है ?????????
आज ही इस दहेज रूपी बीमारी के खत्म कर इस पाप से बचाव करते है ,क्योंकि आज नही तो कल हमे लिया हुआ कर्ज चुकाना ही पड़ेगा ये तो काल भगवान का नियम है ।
ऐसा न हो कि कुत्ता गधा बनकर बोझ उठाना पड़े।
वर्तमान समय मे संत रामपाल जी महाराज कर रहे है एक दहेज मुक्त समाज का निर्माण।
तो आईये हम भी ये कदम उठाते है और प्रण लेते है कि ना हम दहेज देंगे और न ही लेंगे ।
सच होगा सबका सपना
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